पल.

पल ही ऎसा था कि हम इंकार ना कर पाए,
ना थी जिनके बिना जिंदगी मुनासिब,
छोड दिया साथ उन्होने और हम सवाल भी ना कर पाए ।

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होशियार कौवा.