शेर जो मेरे नही, लेकिन मेरे दिल को छू गए. ऎसेही कुछ शेर आपके लिये.
शराब के जैसा किरदार है मेेरा साहिब,
किसी को जान से प्यारा हूं,
तो, किसी को नाम से ही नफरत है।
एक निंद हैं जों लोगों कों रात भर नहीं आती...
और एक जमीर है जो हर वक्त सोया रहता है !!
यहाँ जीना है तो . .
नींद में भी पैर हिलाते रहिये . .
वर्ना दफ़न कर देगा . .
ये शहर मुर्दा समझकर . .
किताब-ए-दिल का कोई सफा खाली नही होता, मेरे दोस्त वो भी पढ लेते है,जो लिखा नही होता.
छोटे से दिल में गम बहुत है, जिन्दगी में मिले जख्म बहुत हैं, मार ही डालती कब की ये दुनियाँ हमें, कम्बखत दोस्तों की दुआओं में दम बहुत है.
जरा सा भी नही पिघलता दिल तुम्हारा,
इतना कीमती पत्थर कहाँ से खरीदा....
सजदों में भीगती है जिनकी आँखे वो लोग छोटी बातों पर रोया नहीं करते
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मौसम बहुत सर्द है . .
चल ए दोस्त . .
गलत-फहमिओ को . .
आग लगाते हैं . .
इश्क़ कर लीजिये बेइंतिहा किताबों से
एक यही हैं जो
अपनी बातों से पलटा नहीं करतीं
अच्छी लगने लगी है अब ये ख़ामोशियाँ भी हमें,
किसी को जवाब देने का सिलसिला जो ख़त्म हो गया !!
मेरा दर्द भी वही था और मरहम भी वही था महफिल में इस बात से अनजान बचा भी वही था
कभी है ढेरों खुशियाँ तो, कभी गम बेहिसाब हैं...
इम्तिहानों से भरी जिन्दगी इसी लिए लाजवाब है...