इश्क.

बगर जाने पहचाने इकरार ना किजीए
मुस्कूराकर दिल को बेकरार ना किजीए,
गुलाब भी दे जाते है जख्म गहरा कभी कभी,
हर गुलाब पर युं ऎतबार ना किजीए।

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