जुदाई.

जमाने से नही तो तनहाई से डरता हू,
प्यार से नही तो रुसवाई से डरता हूं,
मिलनेकी उमंग बहोत होती है दिलमें,
लेकिन मिलने के बाद तेरी जुदाई से डरता हूं ।

2 comments:

"अर्श" said...

वाह बहोत ही खूब लिखा है ढेरो बधाई आपको

अर्श

Anonymous said...

Gajab likhte hai..

होशियार कौवा.