चाहत.

इस कदर हम यार को मनाने निकले,
उसकी चाहत के हम दिवने निकले,
जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा,
तो उसके होठॊंसे वक्त ना होनेके बहाने निकले ।

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होशियार कौवा.